यह ध्यान अभ्यास कोरोना वाइरस महामारी के खिलाफ हुआ कारगर

भारत में कोरोना वाइरस महामारी का प्रसार रोकने के लिए सरकार ने लोगों को अपने घरों में ही रहने की सलाह दी है। रास्ता मुश्किल है पर यह समय धैर्य रखने का है। कई लोग लॉकडाउन का सदुपयोग अपने मन को शांत और शरीर को तंदरुस्त रखने में कर रहे हैं। इस दोरान फालुन दाफा ध्यान-अभ्यास लोगों को बेहद लुभा रहा – यह अभ्यास, आध्यात्मिक विकास के साथ आपकी प्रतिरोधक शक्ति भी बड़ता है।

“सर्वश्रेष्ठ हेयर स्टाइलिस्ट” से सम्मानित सेलिब्रिटी हेयर स्टाइलिस्ट गेब्रियल जॉर्जियो ने फालुन दाफा अभ्यास को अपने “शांत मन और ऊर्जा का असीम स्रोत” बताया। गेब्रियल जो की दीपिका पादुकोण, अनुष्का, करीना कपूर, प्रियंका चोपड़ा, जेसे बड़े बॉलीवुड सितारों और जेसिका अल्बा, रॉबर्ट डाउनी जूनियर और ऐसे ही कई मशहूर हॉलीवुड के सितारों के बीच अपनी चमक बिखेर चुके हैं।

गेब्रियल का कहना है: “फैशन और ग्लैमर की दुनिया के मोहक बुलबुले में रहने के दौरान उसके भ्रम में खो नहीं जाना, स्वयं के प्रति ईमानदार रहना, और इस इंडस्ट्री की चकाचौंध द्वारा भ्रमित नहीं हो जाना ही सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता है। उनका कहना है: “फालुन दाफा अभ्यास करने से मैं अपने आप में निरंतर सुधार देखता हूँ। मैं केवल बेहद स्वस्थ ही नहीं बन पाया हूँ बल्कि मेरे अंदर बहुत उर्जा आ गई है और मैं सकारात्मक महसूस करता हूँ।”

फालुन दाफा बुद्ध विचारधारा पर आधारित मन और शरीर का उच्च स्तरीय अभ्यास है जिसमें पांच सौम्य व्यायाम और नैतिक गुण साधना शामिल है। व्यायाम शरीर को शुद्ध करने, तनाव से राहत और आंतरिक शांति प्रदान करने में सहायता करते हैं। फालुन दाफा, जिसे पहली बार चीन में मई 1992 में श्री ली होंगज़ी द्वारा सार्वजनिक किया गया, आज 114 से अधिक देशों में 10 करोड़ से अधिक लोगों में लोकप्रिय है। श्री ली को स्वतंत्र विचारों के लिए ‘सखारोव पुरस्कार’ से सम्मानित किया जा चुका है और ‘नोबेल शांति’ पुरस्कार के लिए भी पांच मनोनीत किया जा चुका है। फालुन दाफा और श्री ली होंगज़ी को, दुनियाभर में 1,500 से अधिक पुरस्कारों और प्रशस्तिपत्रों से भी नवाज़ा गया है।

वही मिस्टर इंडिया फाइनलिस्ट रह चुके अधिराज चक्रबर्ती मुंबई के एक प्रतिष्ठित मॉडल और उभरते हुए फैशन फोटोग्राफर हैं जो फालुन दाफा का अभ्यास करते हैं, उनका कहना है कि जब लॉकडाउन में अधिकांश चीजें सामान्य रूप से काम नहीं कर रही हैं, यह बहुत जरूरी है कि “हम अपने मन को खाली न रखें।” उनोनें कहा इस खाली समय ने उनें फालुन दाफा अभ्यास को नियमित रूप से करने में मदद की है. “फालुन दाफा मेरे मन को शांत और संयमित रहने में मदद करता है। इसके अलावा यह अभ्यास प्रतिरोधक शक्ति को मज़बूत बनाने में मदद करता है, इसलिए सहज ही मैं काफी ऊर्जावान और सक्रिय महसूस करता हूँ।”

डॉ. लिली फेंग, बेलोर कॉलेज ऑफ मेडिसिन, टेक्सास, में इम्यूनोलॉजी की प्रोफेसर के शोध के अनुसार फालुन दाफा बीमारियों के विरुद्ध प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने में कारगर है। डॉ. लिली फेंग ने सफेद रक्त कोशिकाओं (न्युट्रोफिल) के जीवन काल और कार्य की जांच की जिसमे पाया गया कि फालुन दाफा अभ्यासियों के न्यूट्रोफिल का इन-विट्रो जीवन काल नियंत्रण समूहों की तुलना में 30 गुना अधिक था और वे बेहतर कार्यशील थे। यह कुछ बीमारियों के लिए प्रतिरक्षा और स्वास्थ्य लाभ को दर्शाता है।

स्वस्थ शरीर से सब कुछ हासिल किया जा सकता है, शायद यही कारन है की फालुन दाफा अभ्यास बैंगलोर, नागपुर, लेह, लद्दाख, वाराणसी के विभिन्न स्कूलों में भी लोकप्रिय हुआ है। जहां छात्र इन व्यायामों को सुगमता से करते रहे हैं, शिक्षक छात्रों के व्यवहार और शैक्षणिक परिणामों में सुधार से प्रसन्न हैं। क्रोनावायरस के प्रकोप को रोकने के लिए लॉकडाउन दोरान कई बच्चे अब स्कूल नहीं जा रहे हैं तो फ्री ऑनलाइन फालुन दाफ़ा अभियास क्लास में हिस्सा ले रहे हैं। फालुन गोंग के अभ्यास के बाद शिक्षकों ने अपने छात्रों के बुरे व्यवहार में बदलाव अनुभव किया, और स्कूल के शैक्षणिक परिणामों में सुधार हुआ।