दुनियां में हर धर्म अलग है और हर धर्म के धर्माधिकारियों के नियम कायदे अलग हैं सबकी अपनी अपनी परंपराएं हैं और सबकी अपनी संस्कृति है इन्ही धर्मों में से एक है बौद्ध धर्म जिसके नियम कायदे और दीक्षा के साथ साथ परीक्षाओं का अपना एक अलग तरीका है बौद्ध धर्म में सबसे बड़ी उपाधी दलाई लामा की मानी जाती है जिसका सम्मान भी सबसे ज्यादा किया जाता है लेकिन क्या आपको पता हैं कि दलाई लामा का चुनाव कैसे होता है और किन किन परीक्षाओं से होकर गुजरना पड़ता है साथ ही उपाधि मिलने के बाद किन नियमों का पालन करना होता है अगर नहीं पता तो आज ये पूरी जानकारी हम आपको देंगे बौद्ध धर्म के अनुयायी दलाई लामा को अपने भगवान के रूप में देखते हैं दलाई लामा तिब्बती बौद्धों के अध्यात्मिक, धार्मिक और राजनीतिक गुरु होते हैं तिब्बती बौद्धों में दलाई लामा का चुनाव करने के लिए एक लंबी और गौरवशाली परंपरा रही है !
तिब्बतियों के 14वें गुरू दलाई लामा तेनज़िन ग्यात्सो की उम्र और तबियत बिगड़ने के साथ ही नए दलाई लामा के चुनाव को लेकर चर्चा का दौर तेज हो गया है इस बात पर चर्चा शुरू हो गई है कि 15वें दलाई लामा कौन होंगे दरअसल दलाई लामा का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण और लाखों लोगों की आस्था का प्रतीक होता है हालांकि चीन हमेशा से दलाई लामा के चयन में अपना दखल बनाए रखना चाहता है जबकि भारत तिब्बती बौद्धों के परंपरा का सम्मान करते हुए उन्हें अपने तरीके से दलाई लामा का चुनाव करने का समर्थन करता है ‘दलाई लामा’ मंगोलियाई शब्द ‘दलाई’ से लिया गया है, जिसका अर्थ है ‘सागर’ और तिब्बती शब्द ‘लामा’, जिसका अर्थ है ‘गुरु’ या ‘शिक्षक’ वर्तमान के और 14वें दलाई लामा तेनज़िन ग्यात्सो हैं दलाई लामा का जन्म 1935, तिब्बत में हुआ था और उन्हें दो साल की उम्र में 13वें दलाई लामा के पुनर्जन्म के रूप में मान्यता मिली थी तिब्बत में चीनी शासन के खिलाफ विफल विद्रोह के बाद 1959 में वे भारत भाग आए और तब से भारत में रह रहे हैं तिब्बती समुदाय के अनुसार लामा, ‘गुरु’ शब्द का मूल रूप है एक ऐसा गुरु जो सभी का मार्गदर्शन करता है !
दलाई लामा के चयन की प्रक्रिया में पिछले दलाई लामा के पुनर्जन्म की खोज शामिल है, जिसे ‘स्वर्ण कलश’ प्रक्रिया के रूप में जाना जाता है जब दलाई लामा की मृत्यु हो जाती है, तो उनके पुनर्जन्म की खोज के लिए उच्च लामाओं की एक परिषद का गठन किया जाता है लामा के निधन के आसपास पैदा हुए बच्चों की खोज की जाती है कई बार ये खोज सालों तक भी चलती है तब तक कोई स्थाई विद्वान लामा गुरु का काम संभालता है वे अपनी खोज में उनका मार्गदर्शन करने के लिए विभिन्न चिह्नों और भविष्यवाणियों के साथ-साथ दलाई लामा के स्वयं के लेखन और शिक्षाओं का परामर्श लेते हैं वे एक ऐसे बच्चे की तलाश करते हैं जो पिछले दलाई लामा की मृत्यु के समय पैदा हुआ था !
वर्तमान दलाई लामा का जन्म 6 जुलाई 1935 को तिब्बत के उत्तर पूर्वी तिब्बत में एक किसान परिवार में हुआ था ये जब महज दो साल के थे तभी इनकी पहचान 13वें दलाईलामा, थुबटेन ग्यात्सो के पुनर्जन्म के रूप में की गई और तेंजिन ग्यात्सो नाम दिया गया तभी से 14वें दलाई लामा तेंजिन ग्यात्सो हैं तेंजिन ग्यात्सो ने मठ से जुड़ी शिक्षा 6 साल की आयु में शुरू कर दी थी उनकी शिक्षा नालंदा परंपरा पर आधारित थी इसमें उन्हें तर्कशास्त्र, ललित कला, संस्कृत व्याकरण और औषधि का ज्ञान लिया दलाई लामा ने बौद्ध दर्शन का ज्ञान भी अर्जित किया है अब मौजूदा दलाई लामा की तबियत बिगड़ने के बाद एक बार फिर ये तलाश तेज हो गई है और तिब्बती लोग अभी से रिसर्च में लगे हैं कि जब इन दलाई लामा का वक्त पूरा होगा तो दूसरे दलाई लामा को खोजना है और उसी के आधार पर उनकी शिक्षा और दीक्षा का कार्य किया जाएगा !